02 जून, 2005

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9 Comments:

At 16 जून, 2005, Blogger अनुनाद सिंह said...

इस देश का दुर्भाग्य है कि वास्तविक देशसेवियों का कोइ नाम तक नही जानता और मलाई खाने वालों को भारत का निर्माता और न जाने क्या-क्या कह- कह कर चिल्लाया जाता है ।

हिन्दी चिट्ठाकारों की इस मडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । इस महान काम को हाथ मे लिये आपके सामने अनुनाद नतमस्तक है ।

 
At 20 जून, 2005, Anonymous बेनामी said...

hum jaisa boenge vaisa hi katenge
jamane ko dosh dene se koi matlab nahi niklta humne apatr logon ki puja ki aur yogy vyktiyon ko najarandaj kar diya jisaka prinam hum sab ke samne hai saralji per aapka yah pryas sarahniy hi nahi pnamy hai
utkarsh,luckhnow

 
At 24 जून, 2005, Anonymous बेनामी said...

सरल जी की कविताएँ पढ़कर आजादी के दीवानों की याद ताजा हो गयी। बहुत अच्छा काम किया है आप लोगों ने जो सरल जी को दुनियाँ के पाठकों तक पहुँचा दिया।
-अविनाश कुमार

 
At 28 जून, 2005, Blogger Manoshi Chatterjee said...

मुझे याद है जब मैं कक्षा पाँचवी में थी तब श्री कृष्न सरल जी हमारे स्कूल में आये थे और अपनी कविताऒं का पाठ किया था। मुझे अभी भी याद है कि उनके कविता पाठ से हम सब इतने प्रभावित हुये थे कि उस सारे दिन हम सब देशप्रेम से गद-गद रहे थे ( हम तब १० साल के बच्चे थे) और उनकी लिखी तीन किताबें अभी भी हैं मेरे पास उनमें से एक बाघा जतिन की कहानी थी और दो और कविताओं की किताब। और इतने सालों बाद भी उनकी वो छवि मन में बसी हुई है।

--मानोशी

 
At 12 जुलाई, 2005, Blogger Pratyaksha said...

सरल जी की कवितायें हम सब तक पहुँचा कर आपने बहुत बडा काम किया...आशा है शीघ्र ही और कवितायें पढने को मिलेंगी...
प्रत्यक्षा

 
At 15 जुलाई, 2005, Anonymous बेनामी said...

sampadak ji,
desh ke sawnam dhany rashtr kavi saralji ko samrpit aapka yah pryas nissandeh vandniya hai.isper aap saral ji ke mahakavyon ka krmik prkashan krenge to uttam rhega.

Avnish Shrma
Asst.Prof.
N.E.S collage
Hoshangabad.mp

 
At 18 जुलाई, 2005, Anonymous बेनामी said...

Apke sujhau ke liye dhanybad. Saral ji ke mahakavyon ke prakashan ke vyavastha ka prayash chal raha hai. jaldi hi mahakavyon ko net per aap dekh sakainge. pahle CHANDRA SHEKHER mahakavya dene ka vichar hai.
Sampadak

 
At 03 दिसंबर, 2005, Anonymous बेनामी said...

सरल जी का सुप्रसिद्ध महाकाव्य चन्द्रशेखर आज़ाद यहाँ देख सकते हैं।
www.hindigagan.com

 
At 23 मार्च, 2012, Anonymous Rahul Sharma said...

Mujhko meri Khud Ki Khabar Na Lage,
Koi Achha B Is Kadar Na Lage,
Aap Ko Dekha Hai Bas Us Nazar Se,
Jis Nazar Se Aap Ko Nazar Na Lage

 

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